“शौर्यम..दक्षम..युध्धेय, बलिदान परम धर्मा”

शिवांश जम्मू के डोडा में पोस्टेड स्पेशल पैरा मिलिट्री रेजिमेंट का कैप्टन है।
शिवांश सुबह उठता है और उसे पता चलता है कि LOC से सटे एक घर में, एक आतंकी छिपा बैठा है।
Captain शिवांश अपनी टीम के साथ घर को घेरने के लिए सेना की गाड़ी लेकर निकलते है और थोड़ी देर चलने के बाद वो टारगेट से २०० m पहले देखते है, कि रास्ते में बहुत भीड़ लगी हुई होती है।
कैप्टन शिवांश अपने २ कमांडोज को उतर कर देखने के लिए कहते है , कमांडो गाड़ी से उतर कर भीड़ की तरफ बढ़ते हैं और देखते हैं कि वहां एक लड़का जो अर्ध नग्न अवस्था में था, वो ज़मीन पर मृत पड़ा हुआ था, कैप्टन शिवांश गाड़ी को वहीं खड़ी कर ज्यादातर सैनिकों को पैदल मार्च कर के घर को चारो तरफ़ से घेरने का आदेश देते हैं और स्वयं उस लड़के की लाश के निकट दो कमांडो के साथ लाश की शिनाख्त करने लगते हैं।

तभी कैप्टन शिवांश देखते हैं कि लाश की कमर में, बाए अलंग की तरफ पैंट में एक कागज़ का टुकड़ा था जो बहार निकला हुआ था, कैप्टन कागज़ के टुकड़े को बाहर निकालते हैं, जिसमें लिखा था !!  
"Captain ये तो बस एक छोटा सा तोहफ़ा है ,आगे घर में बढ़ो एक बड़ा तोहफ़ा छिपा रखा है"

कैप्टन डोडा, जम्मू पुलिस के पास कॉल करते हैं और फोरेंसिक टीम के साथ आकर घटना स्थल की जांच करने को कहते है।
वहा मौजूद लोगों को हटा कर एक कमांडो लाश के पास छोड़ कर और एक कमांडो अपने साथ उस घर की तरफ  बढ़ते हैं जिसमे आतंकी छिपा था।
कैप्टन टारगेट हाउस के पास पहुंचते है, वहा वो देखते है, कि घर के बाहर एक वयोवृद्ध महिला और पुरुष की लाश पड़ी हुई थी , महिला के हाथ में तुलसी माला थी, जिससे खून टपक रहा था।
बगल में पड़े उस वयोवृद्ध पुरुष के दाहिने हाथ में पड़ा था एक फोन और बाए हाथ में पड़ा था एक कागज़ का टुकड़ा।
जिसमे लिख था "कैप्टन शिवांश को कमांडर अल्लाह बक्श का आदाब! तोहफ़ा घर में है, ऐसे ही और तोहफे मिलते रहेंगे,"

कैप्टन ट्रूप्स को घर में घुसने को कहते है तभी अचानक अंदर से फायरिंग होने लगती है, कैप्टन भी फायर का आदेश देते है और 5 मिनिट की लगातार फायरिंग के बाद अंदर से फायरिंग होना बंद हो जाती है ।
अचानक अंदर से चीखने की आवाज़ आती है और थोड़ी देर बाद एक लड़की अंदर से बचाओ बचाओ चीखते हुए बाहर आती है।
वो लड़की कमांडोज के सामने हाथ उठा कर सरेंडर की मुद्रा में खड़ी हो जाती है।
कैप्टन और उनके ट्रूप्स लड़की को घुटने टेकने को कहते हैं उसके बाद कैप्टन अपने 10 जवानों के साथ आगे घर की तरफ़ बढ़ते हैं और देखते हैं की ज़मीन पर एक लड़की की लाश पड़ी थी जिसकी उम्र करीब 18–20 वर्ष रही होगी उसके गले में एक धारदार शीशे का टुकड़ा चुभा हुआ था, बाए कंधे पर एक गोली और एक गोली उसकी छाती पर लगी हुई थी।
उसके शरीर पर पाकिस्तानी एस एस जी कमांडो की वर्दी थी,
हाथ में Ak-47 असॉल्ट राइफल और कमर में करीब 4 राउंड मैगजीन थी, दृश को देखकर यही लगता था कि वह मृत लड़की पक्का ही कोई आतंकी रही होगी।

कैप्टन फोन कर के ये सारी डिटेल्स अपने आला अधिकारी मेजर खुद्दार सिंह 🪖 को बताते हैं और उसके बाद कैपटेन फोरेंसिक की टीम को कॉल कर के रोड पर पड़ी लाश के सैंपल लेने के बाद घर की तरफ आकर, बाहर पड़ी दोनो वयोवृद्धों और घर के अंदर पड़ी मिलिटेंट के सैंपल लेने को कहते हैं।
कैप्टन अपने ट्रूप्स के साथ घर की छानबीन करने लगते हैं।
थोड़ी देर की छानबीन के बाद वहा पड़े एक पुराने रेडियो पर नजर पड़ती है जोकि पड़े–पड़े ही कंपन कर रहा था। कैप्टन उस रेडियो के नजदीक जाते हैं और देखते हैं कि वह रेडियो चालू था।
कैप्टन रेडियो 📻 को धीरे से  उठाते हैं और उठा कर एविडेंस बैग में जस का तस रख देते हैं और वहां से उठाए सभी सबूतों को गाड़ी में रखने का आदेश देते हैं।

कैप्टन फिर से फोरेंसिक की टीम को कॉल करने का प्रयास करते हैं तो नो सर्विस होने की वजह से कॉल नहीं लगता तब फिर कैप्टन दोबारा फोन करने का प्रयास किए बिना घर से बाहर चले जाते हैं और देखते है की फोरेंसिक की टीम बाहर पड़ी वयोवृद्ध लाशों का सैंपल ले रही थी।
कैप्टन वहा बाहर मौजूद कमांडो से पूछते है की क्या यहां नेटवर्क आ रहा है, तो वहा खड़ा कमांडो बताता है कि सर डोडा में सभी तरह कि वायरलेस सेवाए बंद कर दी गई हैं अब तो डोडा के बाहर ही जाकर सेवाए वापस चालू होंगी,
कैप्टन पूछताछ करने के लिए उस लड़की के पास जाता है और उससे पूछताछ शुरू करते हैं।
वह लड़की रोते रोते बताती है उसका नाम शिवानी है, और जो बाहर दोनो जो वयोवृद्ध महिला और पुरुष मारे पड़े है वह उसके माता पिता हैं। 
वो बताती है कि जो अंदर लड़की की लाश पड़ी है उसी ने इन्हे मारा है।
कैप्टन अपने नाम से मिलता जुलता नाम सुनकर थोड़ा हंबल हो जाते है और फिर उससे पूछते हैं की वो अंदर पड़ी आतंकी कैसे मारी गई, जिसके जवाब में शिवानी बताती है की जब मैं अंदर थी तो अचानक उसने मुझपर बंदूक तान रखी थी और तभी अचानक से बाहर से आवाज आती है "बंदूके फेंक कर सरेंडर कर दो हम तुम्हे कुछ नही करेंगे" उतने में सर अंदर से उस आतंकी ने फायरिंग शुरू कर दी और तभी एक गोली उसके कंधे पर और एक गोली उसकी छाती में जा लगी और एक गोली वहा रखे फ्लावर पॉट पर चली जिससे वो पाॅट टूट गया।
मैंने मौका देखकर उस फूटे वाश के टुकड़े को इसकी गर्दन में दे मारा और ये तुरंत ही मर गई और मैं बच कर बाहर आ गई।
कैप्टन शिवांश पूछते है की वो मिलिटेंट घर में कैसे आई ? तो शिवानी बताती है कि कल रात के १०:०० बजे इस लड़की ने दरवाजा खटखटाया पिता जी ने दरवाज़ा खोला और तुरंत ही बंदूक दिखा कर अंदर घुस गई और बोलने लगी कि उसके पीछे पुलिस लगी हुई है उसे बस २ दीन की शरण चाहिए और कुछ नहीं।
कैप्टन शिवांश ने पूछा की जब उसे शरण चाहिए थी तो उसने तुम्हारे पिता माता जी को क्यों मारा?
शिवानी बताती है की रात करीब २ बजे उस आतंकी को किसी लड़के का फोन आया था और वो आतंकी किसी को कुछ बता रही थी जिसको मेरे पिता जी ने सुन लिया और जिसके बाद उसने तुरंत ही मेरे पिता जी पर गोली चला कर मार दिया।
मेरी मां , मैं और मेरे भाई गोली की आवाज सुन कर जब उस आतंकी के पास गए तो उसने मेरी मां और भाई को भी मार दिया।
सारी रात मुझसे उनके जिस्म से निकले खून के छीटों को फर्श से साफ करवाया और जैसे ही साफ सफाई कर के मैं उठी तो मुझे मारने के लिए मुझ पर बंदूक तान दिया और तब तक आप सभी आ गए।
कैप्टन चौक कर पूछते है कि तुम्हारा भाई ? मगर वो कहा है? तभी कैप्टन रास्ते में पड़ी उस लड़के की लाश की खींची तस्वीर दिखाकर पूछते हैं कि क्या तस्वीर वाला व्यक्ति उसका भाई है?
शिवानी रोते हुए जवाब देती है की हां वो उसका भाई ही है।
तभी फोरेंसिक की टीम वहा सैंपल्स ले कर आ जाती है और कैप्टन से लाशों को एंबुलेंस में रखने की इजाज़त मांगती है। 
कैप्टन सभी एविडेंस 🧾 को कमांडोज से दोबारा वेरिफाई करने को कहते हैं और वेरिफिकेशन के बाद कमांडोज एविडेंस को एंबुलेंस में रख देते है मगर तभी कैप्टन उन एवीडेंस को निकाल कर अपनी गाड़ी में रखने का आदेश देते है,
लेकिन वो रेडियो जो उन्हें मिला था वो गलती से एंबुलेंस में भूल जाते हैं, और अपनी गाड़ी बैठ कर शिवानी को लेकर हेड क्वार्टर्स के लिए निकलते हैं।
तभी रास्ते में अचानक एविडेंस के पैकेट में रखे फोन जो वयोवृद्ध पुरूष के हाथ में था उस पर कॉल आता है जिस पर लिखा था पिंकी मौसी कश्मीर, कैप्टन फ़ोन स्पीकर पर रख कर शिवानी से बात करने को कहते है शिवानी फोन उठाती है और हेलो कहती है तो फोन से एक अजीब से आवाज जो की महिला की थी आती है की आधी चूड़ी कर रखी कलम जल्द गिर जायेगी, शिवानी हेलो–हेलो करती है तब तक आवाज बंद हो जाती है मगर कॉल अब भी ऑन था।
तभी गाडियां सिग्नल पर रुक जाती है मगर एंबुलेंस आगे निकल जाती है, 
कैप्टन पिंकी मौसी का फोन काटते है और जैसे ही फोन काटते है वैसे ही सामने जा रही एंबुलेंस में जोर का धमाका होता है और उस एंबुलेंस के चीथड़े उड़ जाते है और उस एंबुलेंस में बैठे ड्राइवर और सह कर्मी भी उसमे मारे जाते हैं।
कैप्टन अपने आधे ट्रूप्स को घटना स्थल पर छोड़ कर शिवानी को साथ लेकर हेडक्वार्टर निकल जाते हैं,
कैप्टन हैडक्वार्टर पहुंचते है और अपने ट्रूप्स से कह कर एविडेंस को एविडेंस रूम रखने का आदेश देते हैं और खुद मेजर खुद्दार सिंह को ग्राउंड रिपोर्ट देने के लिए उनके केबिन में चले जाते हैं।
मेजर खुद्दार सिंह कैप्टन शिवांश से पूछते है की क्या प्रोग्रेस है?
कैप्टन शिवांश मेजर खुद्दार सिंह को घटना के बारे में विस्तार से बताते हैं।
मेजर खुद्दार सिंह में सारी बात ध्यान से सुनी और शिवानी पर नज़र रखने को कहते हैं और उसे आर्मी सेल रखने को कहते हैं,
कैप्टन शिवांश जिसपर मेजर सिंह को टोकते हुए कहते हैं,  सर मगर शिवानी तो इनोसेंट है और उसे रखना ठीक नहीं होगा।
जिस पर मेजर जवाब देते हैं कि अभी तक जितनी बाते उसने बताई हैं एक बात का प्रूफ नहीं है जब तक फोरेंसिक की रिपोर्ट नहीं आ जाती कुछ कह नहीं सकते, और तब तक उस लड़की को यहीं हेडक्वार्टर में ही रहना पड़ेगा।
मेजर कहते है कि और तुम इस शिवानी में अपनी शिवांगी को मत ढूंढो।

( मेजर, शिवांगी कह कर कैप्टन शिवांश की girlfriend को संबोधित कर रहे हैं जो ७ साल पहले captain शिवांश को छोड़ कर USA नौकरी करने चली गई, शिवांगी ने कैप्टन शिवांश को इसलिए छोड़ा क्यों की वो चाहती थी की कैप्टन उसके साथ USA में सेटल हो जाए, मगर कैप्टन शिवांश ने मोहब्बत के आगे देश की सेवा को रखा)


कैप्टन शिवांश मेजर के केबिन से बाहर आते हैं तो बाहर देखते है कि हलचल मची हुई थी, शिवानी जो interrogation cell में थी अचानक बेहोश हो गई, 
कैप्टन शिवांश कॉल कर के सेना के डॉक्टर को बुलाते हैं और डॉक्टर बताता है कि शिवानी को थकान की वजह से उत्पन्न कमजोरी के चलते चक्कर आ गया था।
कैप्टन शिवांश की समस्या ये थी कि शिवानी में उन्हें शिवांगी दिख रही थी और वो जिसकी वजह से उत्पन्न अपनी भावना की वजह से थोड़े परेशान थे।
कैप्टन शिवांश जाकर शिवानी को करुणा भरी नजरों से देखते हैं और उससे उसका हाल पूछते है और तभी अचानक उनके पास उनके कमांडो का एक फोन 
आता है और कैप्टन शिवांश को दोबारा से क्राइम एरिया की छानबीन के लिए जाना पड़ता है।

कैप्टन शिवांश क्राइम एरिया में पहुंचते है और उन्हें पता चलता है कि जिस घर में वो आतंकी की लाश मिली है उसी एरिया के एक दूसरे घर में जो बहुत वर्षों से बंद था, उस घर में हाल में कालीन के नीचे एक ७ फिट गहरा गड्ढा जो एक कमरे से जुड़ा था जिसमे वो आतंकी रह रही थी, वहा से उसके सैनिटरी पैड मिले।

अब कैप्टेन के जेहन में अल्लाह बक्स द्वारा बोला गया संदेश और पिंकी मौसी का संदेश गूंज रहा था।
कैप्टन शिवांश एक खबरी से पिंकी मौसी कश्मीर के बारे में पता लगाने को कहते है जो की R A & W का एजेंट भी था।
उधर j & K में सेना और पुलिस हाई अलर्ट पर रखी गई थी।
घाटी के सारे महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई।
कैप्टन शिवांश पिंकी मौसी द्वारा बताए गए मैसेज को कागज़ पर उतारते हैं।
    आधी चूड़ी पर रखी कलम

कैप्टन शिवांश को शक था की नए बने चेनाब arc ब्रिज को उड़ने की साजिश हो सकती है।
कैप्टन शिवांश हैडक्वार्टर पहुंच कर सारी जानकारी मेजर खुद्दार सिंह को देते हैं, ।
रात के करीब ११:०० बजे, कैप्टेन के फोन पर R A & W के एजेंट का फोन आता है कि दो दिन पहले किसी एक गाड़ी को चेनाब ब्रिज के पास देखा गया था।


चेनाब रेलवे ब्रिज जो डोडा से २०० km ki doori par tha, कैप्टन शिवांश गाड़ी लेकर स्पेशल फोर्सेज के जवानों के साथ रात में JUDDA की तरफ़ निकलते है, सुबह करीब ५ बजे कैप्टन को R A & W के एजेंट का फोन आता है कि इनफॉर्मेशन पक्की है रात में एक अनजान गाड़ी को देखा गया है।
कैप्टेन अपनी टीम के साथ सुबह ही चेनाब ब्रिज को पूरी तरह घेर लेते हैं और तभी १०० m दूर पटरियों को रिपेयर करने वाली ट्रॉली पटरी पर आती दिखाई देती है।

कैप्टन शिवांश ने अपनी टीम को सावधान होने को कहा उस ट्रॉली पर दो मजदूर भी बैठे थे जो ट्रॉली ऑपरेट कर रहे थे।
कैप्टन ने उन्हें रुकने को कहा ,मगर तभी उस ट्रॉली पर दोनो व्यक्ति जो रेलवे मैकेनिक की पोशाक में थे अंधाधुंध फायरिंग करने लगते हैं। 
कैप्टन शिवांश ने अपनी टीम के २ जवान जोकि रॉकेट लॉन्चर ऑपरेट कर रहे थे, उनसे उस ट्रॉली को उड़ाने को कहा।
दोनो जवानों ने निशाना लगा कर उस ट्रॉली पर रॉकेट लॉच कर दिया।
और इतना जोर का धमाका हुआ की पूरी घाटी दहल गई।
कैप्टन शिवांश को अंदाजा हो गया की चेनाब ब्रिज को IED से उड़ाने की साजिश थी जो की कैप्टन शिवांश की बहादुरी और फुर्ती से नाकाम हो गई।
कैप्टन को सुबह मेजर खुद्दार सिंह का फोन आता है और 🧬 DNA रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सचमुच वो परिवार शिवानी का ही था, शिवानी ही उन दोनो वयोवृद्धों की बेटी थी और वो लड़का शिवानी का भाई था।
कैप्टन शिवांश को जैसे ही इस ख़बर के बारे me पता चलता है कैप्टन तुरंत डोडा के लिए निकलते हैं और इतने बड़े मिशन के बाद डोडा पहुंच कर मेजर खुद्दार सिंह को रिपोर्ट करते है।
मेजर खुद्दार सिंह कैप्टेन शिवांश को कहते है की अब जाकर पेशेंट से मिल सकते हो।
कैप्टेन शिवांश जा कर शिवानी से मिलते है जो सेल में बैठकर चाय ब्रेड खा रही थी, कैप्टेन शिवानी के पास शरमाते हुए पहुंचते हैं और उससे कहते हैं कि तुम इतने दिन से यहां परेशान हो गई होगी आओ चल कर तुम्हे घुमा कर आता हूॅं।
कैप्टन शिवांश शिवानी को लेकर एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और कैप्टन ने पहले से ही एक सीट बुक कर रखी थी, कैप्टन जाकर ऑर्डर देते हैं, तभी शिवानी कैप्टन से वाशरूम जाने के लिए इशारा करती है कैप्टन शिवांश टेबल पर वेट करते रहते है और शिवानी नहीं आती है तो कैप्टन शिवानी को देखने के लिए वाशरूम की तरफ़ जाते हैं तभी शिवानी आती हुई दिखती है और फिर थोड़ी देर बैठ कर वो दोनो नाश्ता करने लगते हैं और बैठ कर कुछ हंसी मजाक करने लगते हैं।
कैप्टन शिवानी के साथ बिल देकर गाड़ी में बैठ कर हैडक्वार्टर की तरफ़ चलने के लिए गाड़ी स्टार्ट करते है और थोड़ी ही दूर पहुंचते हैं कि तभी उस रेस्टोरेंट में जोर का धमाका होता है और वो पूरा रेस्टोरेंट तहस नहस हो जाता है।
धमाके की आवाज सुनकर शिवानी डर जाती है और कैप्टन को कस कर पकड़ लेती है।
कैप्टन हेडक्वार्टर में घटना की जानकारी देते है और शिवानी को हेड क्वार्टर छोड़ने जाने लगते हैं, तभी कैप्टन शिवांश के पास फोन आता है और फोन को उठाने के बाद captain शिवांश स्तब्ध हो जाते हैं और थोड़ा अलग बिहेव कर रहे थे, शिवानी पूछती है क्या हुआ तो कैप्टेन बताते है कि कुछ नहीं एक दोस्त का फोन था उसने बताया उस रेस्टोरेंट के धमाके के दौरान उसकी बहन भी मारी गई। 
कैप्टन शिवांश हेडक्वार्टर पहुंचते है और फोरेंसिक टीम को कॉल करते है और पूछते हैं की क्या जो मिलिटेंट थी क्या उसने सैनिटरी पैड पहन रखा था, फोरेंसिक टीम का डॉक्टर जब देता है न तो उसके पास कोई सैनिटरी पैड था और नाही उसके पीरियड्स चल रहे थे।

तभी अचानक कैप्टेन शिवांश को मिलने कश्मीर से उसका मित्र Lt राम आता है जो बताता है की उसने पता लगाया की वो नंबर पिंकी नमक कोई औरत का नहीं है बल्कि किसी गुलाम मूसा का है जो गुलाम कश्मीर में रहता है।
तभी अचानक कैप्टन शिवांश के पास R A & W के एजेंट का फोन आता है वो कैप्टेन शिवांश को बताता है की ये हमला गुलाम कश्मीर में बैठे जैश के नए कमांडर अल्लाह बक्श ऊर्फ गुलाम मूसा ने करवाया है।

कैप्टन शिवांश अपने मन में सोचते है कि पिंक मींस गुलाबी, गुलाबी गुलाब या फिर गुलाम मौसी मींस मूसा।
पिंकी मौसी मतलब गुलाम मूसा मतलब अल्लाह बक्स
यानी उस दिन वो फोन गुलाम मूसा ने किया था मगर किसके लिए? यानी वो फोन उस आतंकी के लिए था,
मगर! वो आतंकी तो मर गई तो फिर किसके लिए था वो मैसेज।
मगर! फिर किसके लिए था वो मैसेज?
शिवानी!
मगर! वो तो इनोसेंट है ना?
कैप्टन शिवांश Lt. राम को फोन करता है और उस पर नजर रखने को कहता है।
कैप्टन तुरंत सेना के डॉक्टर को फोन करता है और पूछता है कि उस दिन शिवानी को किस लिए चक्कर आया था?
जिस पर सेना का डॉक्टर हंसकर जवाब देता है कि menstruation 🩸 की वजह से उसे चक्कर आ गया था और मैंने उसको सेनेटरी पैड भी दिया था।
कैप्टन गुस्से से आग बबूला हो जाते है और डॉक्टर से कहते ही कि इतनी बड़ी बात आखिर मुझसे क्यों छिपाई?
डॉक्टर be like: ये तो नॉर्मल है तो इसमें क्या छिपाना और बताना!
कैप्टन शिवांश Lt. राम को फ़ोन कर के शिवानी के चारो तरफ सुरक्षा बढ़ाने को कहते है और Lt Ram से सवाधान होने को कहते हैं।
कैप्टन Shivansh फोरेंसिक को फोन कर के वयोवृद्ध और उनके बेटे के दोबारा 🧬 DNA टेस्ट करने के बारे में पूछते है तो, फोरेंसिक डॉक्टर जवाब देता है कि उन दोनो वयोवृद्धों और उस लड़के का तो सैंपल है मगर उस मृत लड़की का और शिवानी का बचा सैंपल चोरी हो गया?
कैप्टन शिवांश गुस्से में पूछते है की इतनी बड़ी बात तुम मुझे अब बता रहे हो?
तो फोरेंसिक वाला जवाब देता है की सर अगर शिवानी का डीएनए सैंपल मिल जाए तो हम पता लगा सकते है कुछ हद तक।
कैप्टन शिवांश चौक कर कहते है की शिवानी का सैंपल मतलब?
तो डॉक्टर कैप्टन को बताता है की अगर शिवानी का सैंपल मिल जायेगा तो एलिमिनेशन टेक्निक से पता लगा सकते कि शिवानी का dna उसके माता पिता भाई से मैच कर रहा है की नहीं यदि मैच हुआ तो शिवानी ही शिवानी है और यदि नहीं हुआ तो शिवानी आतंकी प्रूव हो जाएगी।
कैप्टन शिवांश को याद आता है की जब ब्लास्ट हुआ था तो शिवानी उसके गले लगी थी तभी कैप्टन Shivansh अपने स्वेटर पर देखता है जिसपर शिवानी के बाल लगे हुए थे।
कैप्टन स्वयं उस बाल के सैंपल को लेकर फोरेंसिक एक्सपर्ट के पास जाते है और वो सैंपल डॉक्टर को देता है और एक्सपर्ट सुबह तक रिपोर्ट देने को कहा है।

तभी रेस्टोरेंट से खबर आती है की जो ब्लास्ट हुआ था वो महिला बाथरूम में रखे एक डस्टबिन में रखें टाइमबॉम्ब की वजह से हुआ था।
कैप्टन शिवांश फ़ोन जैसे ही रखता है वैसे ही Major  खुद्दार सिंह फोन कर के कैप्टन को बुलाते हैं और उसे बताते है कि POK में गुलाम मूसा नाम का आतंकी एक महिला आतंकी संगठन तैयार कर रहा है और उनसे सेना के जवानों को हनी ट्रैप करने की योजना है।

तभी अचानक कैप्टन के पास उनके एक कमांडो का फ़ोन आता है कि एक लाल रंग की कार जो कश्मीर में देखी गई थी वो आर्मी हेड क्वार्टर के आस पास देखी गई है।

कैप्टन शिवांश डोडा पुलिस को फोन कर के अलर्ट कर देते हैं।
रात करीब 2:00 बजे कैप्टन शिवांश हैडक्वार्टर के आस पास के इलाकों में फोर्सेज तैनात होने का आदेश देते हैं।

सुबह सात बजे एक धर्मशाला से 2 बच्चे 16–16 वर्ष के पकड़े जाते हैं, जिन्हे 10 हजार रूपए दे कर हैडक्वार्टर की दीवार उड़ाने का आदेश दिया गया था।
 दोनो बच्चे बहुत गरीब थे।

सुबह के 9:,00 am बजे कैप्टन शिवांश के पास फोरेंसिक एक्सपर्ट का फोन आता है कि जो बाल का सैंपल भेजा गया था उसका मैच नहीं मिला।
जिसका मतलब  ये था कि शिवानी कोई शिवानी नहीं थी बल्कि वो वही मिलीटेंट थी जिसे गुलाम मूसा ने भेजा था और जो असली शिवानी थी उसे शायद इस मिलिटेंट मार दिया।
तभी R A & W के ऐजेंट का फोन आता है वो बताता है की जो आतंकी उस दिन उस घर में थी उसका नाम अरफा खान वानी था जो पाकिस्तान की ssg द्वारा ट्रेंड थी।
कैप्टन शिवांश Lt Ram को फोन करते है मगर वो फ़ोन nHi उठाते तो कैप्टन शिवांश वॉकी टॉकी से हेडक्वार्टर को अलर्ट करती हैं और खुद भाग कर मिलिटेंट एवीडेंस रूम की तरफ़ जाते हैं और देखते है की वो मोबाइल वहा नहीं था।
कैप्टन शिवांश स्पेशल सेल की तरफ़ जाते हैं वहां Lt. Ram नहीं दिखाई देते।

कैप्टन Shivansh नीचे जा कर सभी गेट्स बंद करने का आदेश देते हैं और एक गेट खोलने को कहते है और उस गेट पर स्वयं रॉकेट लॉन्चर से घात लगा कर अपने एक कमांडो के साथ मौजूद रहते हैं।

तभी अचानक हैडक्वाटर की छत पर फायरिंग शुरू हो जाती है और वो मिलिटेंट Lt. Ram के उपर फायरिंग शुरू कर देती हैं l
और जब LT राम अपनी गन में मैग्जीन भर रहे थे,
तभी वो आतंकी मौका देख कर मोबाइल को ब्लास्ट कर के एक छोटा हिस्सा दीवार का तोड़ देती है और उस टूटे दीवार में से निकल कर छलांग लगाकर जमीन पर कूद जाती है।
और मिलट्री की व्हीकल लेकर उस खुले गेट की तरफ बढ़ती है जहा कैप्टन शिवांश घात लगाकर बैठे हुए थे।
जैसे ही वो आतंकी गेट की तरफ बढ़ती है कैप्टन शिवांश आतंकी पर रॉकेट से हमला करते है और उस आतंकी और गाड़ी के परखच्चे उड़ जाते हैं।

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