शांत संगीत



न डर है उसको मृत्यु का,
न डर है उसको शत्रु का,
न डर है किसी के रोष का,
वो पाप पुण्य से परे ,
बहती नदी है जिस्म की,

आवाज सुन सके ,तो सुन,
वो रूह की पुकार है,
वो सत्य है, वो कर्म है,
वो धर्म है, वो मर्म है।

है रामायण का राम वो,
है भागवत का श्याम वो,
है स्वयं परम् धाम वो,
वो गीता की पुकार है,
वो भागवत का सार।

हुआ नही है उसका जन्म,
न कभी उसको मरना है,
वो सत्य है ब्रह्माण्ड का  ,
तू जान ले ,पहचान ले

एक बार दृष्टि डाल ले,
एक बार उसको जान ले,
वो तेरे भीतर ही बसा,
तू जान ले पहचान ले,

न मिलेगा तुझको मंदिर में,
न मिलेगा वो मस्जिद में,
न ही गिरिजाघर,
न ही किसी गुरूद्वारे में

वो शान्त मधुर सा गीत है,
सुन सको तो वो संगीत है,
आवाज है वो अंतर्मन की,
जो रिक्त नहीं संपूर्ण है।
                         - नीतीश तिवारी

Comments

Popular posts from this blog

Can We Remove ‘Secular’ and ‘Socialist’ from the Preamble of the Indian Constitution? | The Real Story

ISLAMIC REVOLUTION : Sexual Violence Against Hindu Girls in Bangladesh

The Dawn Over the Brahmaputra